7. ऐसी ममता को नित्य नमन (पेज -30)



ऐसी ममता को नित्य नमन ...

✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी

माँ के ममता की छाँव है अनमोल, 
इससे बढ़कर नहीं कोई स्वर्ग और भवन, 
तेरे आशीषपूर्ण स्पर्श से हर जाए सारे दुःख, 
ऐसी ममता क़ो नित्य नमन ....

इनके कठिन संघर्ष का मुश्किल वर्णन, 
इनके त्याग का कठिन विवरण, 
संतान की ख़ुशी के लिये सर्वस्व त्याग दे, 
ऐसी ममता क़ो नित्य नमन ...

धड़कन की आवाज भी जिनकी देन है,
जिसने इस सुंदर संसार में क्या हमारा सृजन, 
जिनके दूध का कर्जदार शरीर का कण-कण,
ऐसी ममता को नित्य नमन ...

ऊंचाई चाहे जितनी कर ले हम हासिल, 
छू ले क्यों ना चाहे हम गगन, 
जिनकी गोद में खेला हमारा बचपन, 
ऐसी ममता को नित्य नमन ...

हमारी छोटी सफलता से पुलकित जिसका मन, 
सबसे ज्यादा हमारी सफलता से मनाता हो जश्न, 
कर्जदार उसका यह शरीर और यौवन, 
ऐसी ममता को नित्य नमन ...

इस सृष्टि में अगर हो जाएं हम दफन, 
मेरी मौत से पहले, ख़ुद के लिये मांगे कफ़न, 
अपने कलेजे के टुकड़े के लिये करे सर्वस्व अर्पण, 
ऐसी ममता को नित्य नमन ...

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